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काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) क्या है? Glaucoma Kya Hai?

काला मोतियाबिंद या ग्लूकोमा आमतौर पर आंख के अंदर प्रेशर के निर्माण से जुड़ा होता है जिसे इंट्राओक्युलर प्रेशर (आईओपी) भी कहा जाता है। यह तब होता है जब आंख के अंदर फ्लयूड, एक्यूओस ह्यूमर आंख से बहना बंद हो जाता है। ग्लूकोमा में आई फ्लयूड ड्रेनिंग सिस्टम ब्लॉक हो जाता है, जिससे प्रेशर बनता है। फ्लयूड प्रेशर निर्माण को ऑप्टिक नर्व के बिगड़ने के साथ-साथ जेनेटिक फैक्टर्स के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है। आंख की ऑप्टिक नर्व इमेजेस को ब्रेन तक पहुंचाने के लिए जिम्मेदार होती है।

ग्लूकोमा अगर ठीक नहीं किया जाता या इलाज नहीं किया जाता, तो यह गंभीर और पूरी तरह से डेमैज भी हो सकता है और दृष्टि भी जा सकती है। कई बार जब तक दृष्टि हानि होना शुरू नहीं हो जाती, तब तक ग्लूकोमा में कोई दर्द या परेशानी नहीं होती है। इसलिए ग्लूकोमा जैसी आंखों की बीमारियों का पता लगाने और उनका इलाज करने के लिए नियमित आंखों की जांच करवाना आवश्यक है। दिल्ली/एनसीआर में बेस्ट ग्लूकोमा परामर्श प्रदान करने वाले बेस्ट नेत्र रोग विशेषज्ञों से परामर्श लेने के लिए आईमंत्रा से संपर्क करें।

काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) के प्रकार – Glaucoma Ke Prakar

ओपन-एंगल ग्लूकोमा (Open-Angle Glaucoma – OAG h3)

ओपन-एंगल ग्लूकोमा के वेरिएंट में शामिल हैं:

  • प्राइमरी ओपन-एंगल ग्लूकोमा (Primary Open-Angle Glaucoma – POAG)
  • नॉर्मल-टेंशन ग्लूकोमा (Normal-Tension Glaucoma – NTG)
  • पिगमेंटरी ग्लूकोमा (Pigmentary Glaucoma)
  • स्यूडोएक्सफोलिएशन ग्लूकोमा (Pseudoexfoliation Glaucoma)
  • सेकेंडरी ग्लूकोमा (Secondary Glaucoma)

नॉर्मल-टेंशन ग्लूकोमा (Normal-Tension Glaucoma – NTG)

नॉर्मल-टेंशन ग्लूकोमा (जिसे लो-प्रेशर ग्लूकोमा भी कहा जाता है) पीओएजी के समान है, जो ऑप्टिक नर्व डैमेज के परिणामस्वरूप फील्ड विज़न लॉस की ओर जाता है।

प्राइमरी ओपन-एंगल ग्लूकोमा (Primary Open-Angle Glaucoma – POAG)

पीओएजी (POAG) ग्लूकोमा का एक बहुत ही कॉमन टाइप है। इस टाइप के आई डिफेक्ट में व्यक्ति की पेरिफेरल विज़न बिना कोई अन्य लक्षण दिखाई दिए कम हो जाती है।

पिगमेंटरी ग्लूकोमा (Pigmentary Glaucoma)

यह ग्लूकोमा का एक रेयर फॉर्म है और यह आंख के ड्रेनेज एंगल के बंद होने के कारण होता है। यह आमतौर पर 30 से 40 वर्ष की आयु को प्रभावित करता है।

एक्यूट एंगल-क्लोजर ग्लूकोमा (Acute Angle-Closure Glaucoma)

एक्यूट एंगल-क्लोजर ग्लूकोमा में अचानक लक्षण पैदा हो जाते हैं, जैसे आंखों में दर्द, सिरदर्द, तेज रोशनी के आसपास हैलोज़, फैली हुई पुतलियाँ, लाल आँखें, नोएसिया आदि।

SECONDARY
GLAUCOMA

This is a type of glaucoma that could arise from factors other than natural factors and could be attributed to things like an eye injury or an infection, inflammation>

एंगल क्लोज़र ग्लूकोमा (Angle-Closure Glaucoma)

यह ग्लूकोमा का वह टाइप है जिसमें फ्लयूड आंख के ड्रेनेज एंगल तक नहीं पहुंच सकता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आईरिस और कॉर्निया के बीच ड्रेन की जगह बहुत छोटी हो जाती है।

जन्मजात ग्लूकोमा (Congenital Glaucoma)

यह एक प्रकार का ग्लूकोमा है जो बच्चे अपने माता-पिता से जन्म के समय प्राप्त करते हैं। ये बच्चे ड्रेनेज सिस्टम में खराबी के साथ पैदा होते हैं।

काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) के लक्षण – Glaucoma Ke Lakshan

ग्लूकोमा को कई डॉक्टरों द्वारा ‘साइलेंट थीफ ऑफ विज़न (Silent Thief of Vision)’ माना गया है क्योंकि यह बिना किसी या बहुत कम लक्षणों के साथ आता है और कई लक्षण आपकी दृष्टि को डैमेज करने के बाद ही दिखाई देते हैं। हालाँकि आपको किस प्रकार का ग्लूकोमा हो सकता है, इसके आधार पर कुछ लक्षण हैं जो ग्लूकोमा का जल्दी पता लगाने और मैनेजमेंट करने के लिए हो सकते हैं। वो हैं:

सामान्य लक्षण-

  • आंखों के अंदर सूजन दृष्टि में हैलोज़ का कारण बन सकती है।
  • लाइट सेंस्टिविटी (ब्राइट लाइटें आंखों में समस्या पैदा करती हैं)
  • सुबह का सिरदर्द
  • मोतियाबिंद
  • बेचेनी और उल्टी

ओपन-एंगल ग्लूकोमा (Open-Angle Glaucoma) के लक्षण

अफसोस की बात है कि इस टाइप का ग्लूकोमा दृष्टि के गंभीर नुकसान से पहले कोई लक्षण नहीं दिखाता है। यह सलाह दी जाती है कि अगर आपके परिवार में किसी को यह समस्या होने के कारण आप भी ग्लूकोमा के रिस्क को महसूस करते हैं, तो आपको नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच कराते रहना चाहिए। यह इस डिफैक्ट को बेहतर ढंग से ट्रैक करने, निदान करने और मैनेज करने में मदद करेगा।

क्रॉनिक ओपन-एंगल ग्लूकोमा (Chronic Open-Angle Glaucoma) के लक्षण

इस प्रकार के ग्लूकोमा का पहला साइन साइड विज़न/पेरिफेरल विज़न का नुकसान है। हालाँकि परिवर्तन सूक्ष्म हैं और इसलिए इसे स्वीकार करना कठिन हो सकता है।

एक्यूट क्लोज़्ड-एंगल ग्लूकोमा (Acute Closed-Angle Glaucoma) के लक्षण

कई लोगों ने इसे “अपने जीवन का सबसे दर्दनाक आंखों का दर्द” बताया है। यह ग्लूकोमा टाइप कुछ सबसे दर्दनाक लक्षण पैदा करता है, जैसे- 

  • आँखों में दर्द
  • आँख का लाल होना
  • सिर दर्द
  • दृष्टि का धुंधला होना
  • पुतलियों का फैलना
  • उल्टी और बेचेनी

जन्मजात ग्लूकोमा (Congenital Glaucoma) के लक्षण

जन्मजात ग्लूकोमा बच्चों में जन्म के दौरान होता है और इसके लक्षण पहले कुछ वर्षों में ही सामने आ सकते हैं। इसमे शामिल हैं:

  • आंसू और लाइट से सेंस्टिविटी,
  • पलकों की ऐंठन,
  • बढ़े हुए कॉर्निया और ट्रांसप्लांट कॉर्निया में धुंधलापन,
  • आँखों को रगड़ने की आदत,
  • ग्लूकोमाइंग और ज़्यादातर समय पलकें बंद रखना।

अगर आपकी आंख में चोट लगी हो, सूजन हो या यहां तक ​​कि एडवांस मोतियाबिंद भी हो, तो ग्लूकोमा होने की संभावना है और इनमें से ज़्यादातर मामलों में आपका नेत्र रोग विशेषज्ञ यह जांच करेगा कि आपको ग्लूकोमा भी है या नहीं।

काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) का रिस्क किसे है? Glaucoma Ka Risk Kise Hai?

आपको ग्लूकोमा होने का खतरा है अगर आप-

  • 40 या उससे अधिक आयु वर्ग के हैं।
  • ग्लूकोमा की समस्या पहले से किसी को परिवार में हो।
  • जिन लोगों को आंखों का प्रेशर ज्यादा होता है।
  • दूर-दृष्टि (मायोपिया) या निकट-दृष्टि (हाइपरोपिया) हो।
  • आंख में गंभीर चोट आई हो।
  • स्टेरॉयड या अन्य दवाओं का लंबे समय तक उपयोग किया हो।
  • कॉर्निया बीच में हो।
  • ऑप्टिक नर्व के पतले होने से पीड़ित हो। 
  • डायबिटीज़, माइग्रेन, हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या हो और ब्लड सर्कुलेशन खराब हो।
GLAUCOMA SURGERY

काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) के बचाव – Glaucoma Ke Bachaav

ग्लूकोमा एक ऐसी कंडिशन नहीं है जो किसी भी लक्षण को तब तक प्रस्तुत करती है जब तक कि उसके दुष्प्रभाव शुरू नहीं हो जाते। इस बीमारी का भी पूरी तरह से इलाज नहीं किया जा सकता है, बस इसे मैनेज करने की ज़रूरत है, इसलिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि दृष्टि के पूरी तरह से नुकसान के रिस्क को कैसे कम किया जाए। ग्लूकोमा के रिस्क को कम करने के लिए यहां कुछ स्टेप्स बताए गए हैं। 

क्योंकि शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते हैं, इसलिए सलाह दी जाती है कि कुछ हफ्तों या कम से कम 1 महीने में एक बार व्यापक आंखों की जांच ज़रूर करवाएं।

  • नेत्र रोग विशेषज्ञ द्वारा निर्धारित करैक्टिव आई ड्रॉप लेना बंद न करें, भले ही उनसे थोड़ी परेशानी पैदा हो रही हो।
  • दृष्टि हानि को खत्म करने के लिए चल रही लगातार जांच के साथ-साथ कंडिशन का सूचित प्रबंधन महत्वपूर्ण है।
  • कई रिसर्च्स ने पाया है कि रैग्युलर एक्सरसाइज़ से एक फिट और एक्टिव लाइफस्टाइल बनाए रखने के साथ-साथ धूम्रपान और शराब जैसी बुरी आदतों को छोड़ने से ग्लूकोमा को रोकने और मैनेज करने में काफी मदद मिलती है।

काला मोतियाबिंद (ग्लूकोमा) का उपचार – Glaucoma Ka Upchar

शुरुआत में आपका नेत्र चिकित्सक आपकी आंखों पर प्रेशर कम करने के लिए प्रिस्क्रिप्शन आईड्रॉप या किसी प्रकार की ऑरल मेडिसिन देगा। हालांकि अगर ये दवाएं कोई परिणाम नहीं देती हैं, तो दृष्टि की हानि से बचने के लिए सर्जरी की ज़रूरत होती है। 

ग्लूकोमा के इलाज के लिए पहले उपाय के रूप में सर्जरी की सलाह नहीं दी जाती है। हालांकि अगर आपकी आंख की कंडिशन लगातार खराब होती जा रही है, तो फिर आपको इसके बारे में विचार करना चाहिए, अगर अन्य ट्रीटमेंट और मैनेजमेंट टेकनिक सही रिज़ल्ट देने में फेल हो जाते हैं।

ग्लूकोमा सर्जरी – Glaucoma Surgery

ग्लूकोमा के इलाज के लिए अलग-अलग प्रकार की सर्जिकल प्रक्रियाएं इस प्रकार हैं:

लेज़र सर्जरी (Laser Surgery)

इसका उपयोग क्लॉग्ड ट्यूब्स को साफ करने और निर्मित फ्लयूड प्रेशर को दूर करने के लिए किया जाता है। ग्लूकोमा के लिए लेज़र सर्जिकल प्रक्रियाएं भी कई प्रकार की होती हैं, जो नीचे दी गई हैं:

  • एर्गन लेज़र ट्रैबेक्युलोप्लास्टी (Argon Laser Trabeculoplasty – ALT)
  • सिलेक्टिव लेज़र ट्रैबेक्युलोप्लास्टी (Selective Laser Trabeculoplasty – SLT)
  • लेज़र पेरिफेरल इरिडोटॉमी (Laser Peripheral Iridotomy – LPI)
  • साइक्लोफोटोकोएग्यूलेशन (Cyclophotocoagulation)

ट्रैबेक्युलेक्टॉमी (Trabeculectomy)

इस प्रक्रिया में सर्जन स्केलेरा (आंख का सफेद भाग) में एक छोटा सा कट लगाता है और टिश्यू के कुछ मैश को हटा देता है। ऐसा माना जाता है कि यह आंखों में टिश्यू को ड्रेंज करने में मदद करता है और कुछ आईओपी (IOP) प्रेशर से राहत देता है।

ड्रेनेज इम्प्लांट सर्जरी (Drainage Implant Surgery)

क्योंकि ग्लूकोमा में आई ड्रेनेज सिस्टम लड़खड़ाने लगता है। आंखों से फ्लयूड निकालने का एक तरीका फ्लयूड को बाहर निकालने के लिए एक ट्यूब के साथ एक आर्टिफिशियल सिस्टम को इंप्लांट करना होता है।

इलैक्ट्रोक्योटेरी (Electrocautery)

इस प्रक्रिया में सर्जन आंख के ड्रेनेज ट्यूब में चीरा लगाने के लिए ट्रैबेक्टोम नामक एक हीटिंग डिवाइस का उपयोग करता है। यह टिश्यू के मैश को हीट भेजता है और टीश्यू के निर्माण के साथ-साथ प्रेशर को दूर करने में मदद करता है।

ग्लूकोमा सर्जरी रिस्क – Glaucoma Surgery Risks

कोई भी सर्जिकल प्रक्रिया कॉम्प्लिकेशन्स फ्री नहीं होती है। यहां कुछ रिस्क और कॉम्प्लिकेशन्स हैं, जो ग्लूकोमा के लिए सर्जिकल ट्रीटमेंट के साथ हो सकती हैं।

  • आंखों में दर्द या लालपन
  • हाई और लो आई प्रेशर
  • इंफैक्शन
  • मोतियाबिंद होने का खतरा 
  • सूजन
  • आंख में से खून बहना

ग्लूकोमा सर्जरी की कीमत – Glaucoma Surgery Ke Keemat

ग्लूकोमा उपचार की पूरी कीमत उस प्रक्रिया या परीक्षण के प्रकार पर निर्भर करती है जिससे आप गुजरते हैं। उपचार की कीमत 3,000 रुपये से 10,000 रुपये के बीच अलग-अलग होती है। ग्लूकोमा के उपचार में शामिल कुछ प्रक्रिया, इंजेक्शन, परीक्षण और सर्जरी की अनुमानित कीमत नीचे दी गई है:

उपचारकीमत (₹)

ओसीटी (OCT)

2000-3000
यैग लेज़र – सिंगल आई (Yag Laser – Single eye)2000-3000
ग्रीन लेज़र – सिंगल आई (Green Laser – Single Eye)2000 – 3000
येग ईरिडोटॉमी (YAG iridotomy)2000 – 3000
गॉनियोस्कॉपी (Gonioscopy)500 – 1000
विज़ुअल फील्ड टेस्ट (Visual Field Test)1000 – 2000
कॉर्नियल पैचीमेट्री (Corneal pachymetry)500 – 1000

आईमंत्रा फाउंडेशन समाज के वंचित वर्गों को चैरीटेबल और फ्री ग्लूकोमा उपचार सेवाएं प्रदान करता है। कोई व्यक्ति जिसे आंखों के इलाज की ज़रूरत है, लेकिन ग्लूकोमा के इलाज का खर्च वहन करने में असमर्थ है, वह हमारे अस्पताल आ सकता है और उसका पूरा इलाज फ्री आ फिर बहुत मामूली कीमत पर किया जाएगा।

ग्लूकोमा उपचार के लिए बेस्ट आई हॉस्पिटल – Glaucoma Upchar Ke Liye Best Eye Hospital

भारत में मोतियाबिंद सर्जरी के लिए सबसे अच्छे नेत्र अस्पतालों में से एक है, जैसे एम्स, शंकरा नेत्रालय, एलवीपीईआई और आईमंत्रा। आईमंत्रा (Eye Mantra) ग्लूकोमा के इलाज में सबसे आगे है और इसके डॉक्टरों द्वारा अब तक 1,000 से अधिक आंखों का ऑपरेशन किया जा चुका है।

आईमंत्रा में हम भारत में सबसे अच्छा ग्लूकोमा उपचार प्रदान करते हैं। हमारी सेवाओं की विस्तृत श्रृंखला में दिल्ली-एनसीआर में सस्ती कीमत पर लेज़र और अन्य सर्जिकल प्रक्रियाओं पर आधारित ग्लूकोमा उपचार और ग्लूकोमा मैनेजमेंट शामिल हैं।

ग्लूकोमा डॉक्टर्स - Glaucoma Doctors

ग्लूकोमा सुविधाएं - Glaucoma Facilities

पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

ग्लूकोमा आमतौर पर आंख के अंदर प्रेशर के निर्माण से जुड़ा होता है जिसे इंट्राओक्युलर प्रेशर (आईओपी) भी कहा जाता है। यह तब होता है जब आंख के अंदर फ्लयूड एक्यूओस ह्यूमर आंख से बाहर निकलना बंद कर देता है।

ओपन-एंगल ग्लूकोमा के वेरिएंट में प्राइमरी ओपन-एंगल ग्लूकोमा (पीओएजी), नॉर्मल-टेंशन ग्लूकोमा (एनटीजी), पिगमेंटरी ग्लूकोमा, स्यूडोएक्सफोलिएशन ग्लूकोमा और सेकेंडरी ग्लूकोमा शामिल हैं।

अगर आप आंखों के अंदर सूजन, विज़न में हेलॉज़, लाइट सेंस्टिविटी आदि का अनुभव कर रहे हैं, तो आपको ग्लूकोमा की जांच करवानी चाहिए।

“ग्लूकोमा टेस्ट” की कीमत “फ़ील्ड (Fields) + ओसीटी (OCT) + पैची (Patchy) + गोनियो (Gonio)” सहित, 3,000 रुपये तक हो सकती है। दूसरे टेस्टों की कीमत आईमंत्रा पर 3,000 रुपये से कम है।

कोई भी सर्जरी रिस्क से फ्री नहीं होती है। ग्लूकोमा सर्जरी से जुड़े कुछ रिस्क में आंखों में लालपन, दर्द, खून बहना आदि शामिल हैं। आपको बाद में मोतियाबिंद भी हो सकता है।

अंधापन ग्लूकोमा के सबसे प्रतिकूल प्रभावों में से एक है। और भले ही यह ज़रूरी न हो यदि आप सही समय पर निदान और उपचार कर लें, तो आप ग्लूकोमा से होने वाली दृष्टि के नुकसान से बच सकते हैं।

आंखों का कोई नॉर्मल प्रेशर नहीं है, लेकिन एक औसत व्यक्ति का आईओपी 12 से 22 मिलीग्राम एचजी के बीच होता है।

वैसे तो ऑप्टोमेट्रिस्ट द्वारा इसकी सलाह नहीं दी जाती है। मरिजुआना वैज्ञानिक रूप से कुछ घंटों के लिए आंखों के प्रेशर को कम करने के लिए जाना जाता है। लेकिन क्योंकि ग्लूकोमा के इलाज के लिए पूरे दिन आंख से प्रेशर छोड़ना पड़ता है, इसलिए यह संभव नहीं है।

यहां तक ​​​​कि अगर किसी को यह ऑप्शन चुनना है, तो उसे इसका प्रचुर मात्रा में सेवन करना होगा, जिसका शरीर पर काफी प्रभाव पड़ता है।

भारत में कई अच्छे ग्लूकोमा सर्जन हैं। आईमंत्रा में कुछ टॉप ग्लूकोमा डॉक्टर/सर्जन हैं। डॉक्टर श्वेता जैन भारत में बेस्ट ग्लूकोमा सर्जनों में से एक हैं। डॉक्टर श्वेता जैन ने अब तक 1000 से अधिक ग्लूकोमा सर्जरी सफलतापूर्वक की हैं। आईमंत्रा ग्लूकोमा सर्जरी कार्यक्रम के परिणाम कई लोगों के लिए बेहतर साबित होते हैं। ग्लूकोमा सर्जरी के बाद कई मरीज़ों को बेहतर स्थिति का अनुभव होता है।

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