आंखों की केयर (Eye Care)

दृष्टि दोष सुधार: आंखों की एक्सरसाइज़ और योगा – Correcting Refractive Errors: Aankhon Ki Exercise Aur Yoga

आंखो के लिए योग और एक्सरसाइज़ – Aankhon Ke Liye Yog Aur Exercise

दृष्टि दोष या रिफरेक्टिव एरर्स (Refractive Errors) को ठीक करने और चश्मा हटाने के लिए आईबॉल के आकार के साथ आंखों की पावर को भी बदलना होता है, जो सिर्फ सर्जरी से ही हो सकता है। हालांकि अगर आंखों की समस्या जैसे आंखों में खिंचाव, कंप्यूटर आई स्ट्रेन सिंड्रोम या किसी दूसरी विकसित बीमारियों के कारण होने पर इसे आंखों की एक्सरसाइज़ और आंखों के योग से ठीक किया जा सकता है। 

दृष्टि दोष (रिफरेक्टिव एरर) के कारण –  Refractive Error Ke Karan

दृष्टि दोष या आंखों की समस्या निम्नलिखित कारणों से हो सकती है, जैसे- 

  1. दूरदर्शिता (Farsightedness): ऐसे मामले में जब नेत्रगोलक बहुत छोटा होता है, तो आंखों के पास की वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है, क्योंकि वस्तु से आने वाली प्रकाश किरणें रेटिना के पीछे केंद्रित हो जाती हैं।
  2. निकट दृष्टि दोष/मायोपिया (Near-Sightedness/Myopia): निकट दृष्टि दोष नेत्रगोलक के बहुत लंबा होने पर होता है और वस्तु से आने वाली प्रकाश किरणें रेटिना के सामने केंद्रित हो जाती हैं।

आंखों की एक्सरसाइज़ या सर्जरी – Aankhon Ki Exercise Ya Surgery

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसी विशेषज्ञ ने कहा कि यह ज़रूरी नहीं कि आंखों की एक्सरसाइज़ और आंखों के योग वाले कार्यक्रम खरीदने वाले मरीज़ों की दृष्टि में कोई सुधार होगा। इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह साबित हो कि विज़ुअल ट्रेनिंग और एक्सरसाइज़ से दृष्टि में सुधार होता है।

एक्सरसाइज़ और व्यावसायिक रूप से इनका इस्तेमाल करने वाले लोग हमेशा इनका खंडन करते हैं। भले ही वह लोग इन एक्सरसाइज़ को बढ़ावा देते हैं, लेकिन साथ ही इसमें यह भी जोड़ते हैं कि दृष्टि में सुधार की दर और सीमा पूरी तरह से आपकी आंखों के स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। दुनिया में कोई भी दो लोग एक्सरसाइज़ कार्यक्रम पर सटीक प्रतिक्रिया नहीं दे सकते हैं।

खुद से किये कुछ सवालों से आपको इसका सबसे बेहतर उत्तर मिल सकता है। अगर इसका उत्तर सकारात्मक है तो हां, आंखों की एक्सरसाइज़ से दृष्टि दोष को ठीक किया जा सकता है।

  1. क्या आंखों की एक्सरसाइज़ आपके नेत्रगोलक के आकार को लंबा या छोटा करके बदल सकते हैं?
  2. क्या आंखों की एक्सरसाइज़ से आपके कॉर्निया की शक्ति बदलाव और प्रकाश ठीक रेटिना पर केंद्रित हो सकता है?
  3. क्या आंखों की एक्सरसाइज़ आंख की अनियमित सतह को फिर से आकार दे सकती है, जिससे रेटिना पर प्रकाश का सटीक फोकस हो सके?
  4. क्या आंखों की एक्सरसाइज़ प्राकृतिक नेत्र लेंस के वास्तविक लचीलेपन को बहाल कर सकती हैं?

अगर इन सभी सवालों का जवाब ना हैं, तो सिर्फ तभी आंख के आकार और शक्ति को सर्जरी के बिना नहीं बदला जा सकता।

आंखों की एक्सरसाइज़ और योग की बेसिक टेक्निक – Aankhon Ki Exercise Aur Yog Ki Basic Technique

आंखों की एक्सरसाइज़ के सभी कार्यक्रमों में एक खंडन होता है कि परिणाम आपके आंखों के स्वास्थ्य के अधीन हैं और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। एक्सरसाइज़ की बेसिक टेक्निक हैं:

पलक झपकाना

पलक झपकना एक नैचुरल, रिफ्लैक्स फंक्शन है। ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जो पलक झपकने से आंखों की रोशनी में सुधार को साबित कर सके। हालांकि, ऐसा ज़रूर कहा गया है कि अपनी मर्ज़ी से आंखों को झपकाएं, खासतौर से बिजली के उपकरणों पर काम करते वक्त ऐसा करने से आपकी आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि बिजली के उपकरणों के सामने बैठने पर हमारी पलक झपकने की दर में काफी कमी आती है। पलक झपकने से आंसू विभाजित होते हैं और आंखों में लुब्रिकेंट बना रहता है। इसका सबसे अच्छा तरीका इस एक्सरसाइज़ को पूरे दिन दोहराना है।

पामिंग

पामिंग अपनी हथेलियों से दोनों आंखों को धीरे से ढकने की तकनीक है।

  • गहरी सांस लें और अपनी गर्दन की मांसपेशियों को आराम दें।
  • आपके फोरआर्म्स और कोहनियों को अच्छी तरह से सपोर्ट करें।
  • अब अपनी आँखें बंद करें।
  • धीरे से अपनी दोनों हथेलियों को एक मिनट के लिए अपनी आंखों पर रखें और सामान्य रूप से सांस लें।

पामिंग आंखों को आराम देने वाली एक सहायक तकनीक है, जिससे आंसुओं का विभाजन होता है और आंखों में लुब्रिकेंट बना रहता है।

आठ या सर्कुलर आंखों की गति का चित्र

  • अपने सामने एक बड़े “8” की कल्पना करें, जो लगभग छह फीट दूर हो।
  • घड़ी की सूई की दिशा में इसके आकार का पता लगाने के लिए धीरे-धीरे अपनी आंखों को घुमाएं।
  • इसे तीन से चार मिनट तक दोहराएं।
  • अब ऐसा ही घड़ी की सूई की विपरीत दिशा में करें।

कन्वर्जेंस और ज़ूमिंग

  • एक हाथ की दूरी पर पकड़ी हुई एक पेंसिल टिप पर ध्यान दें।
  • धीरे-धीरे पेंसिल की नोक को तब तक करीब लाएं, जब तक टिप धुंधली न हो जाए।
  • अपनी आंखों को सिरे से न हटाएं और उस पर तब तक ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें, जब तक वह फिर से साफ न हो जाए।
  • जितना हो सके अपने हाथ को खींचते हुए इसे वापस अपनी वास्तविक स्थिति में ले जाएं।
  • इस प्रक्रिया को दस बार दोहराएं।

कन्वर्जेंस एक्सरसाइज़ खासतौर से आपकी निकट दृष्टि की मांसपेशियों को मजबूत करती है। 

साइड टू साइड मूवमेंट

माना जाता है कि आंखों को एक तरफ से दूसरी तरफ ले जाने से भी आंखों को आराम मिलता है।

  • आराम की स्थिति में बैठकर अपनी आंखों को दायीं ओर मोड़ें और कम से कम छह से आठ फीट दूर किसी चीज को देखें।
  • कुछ सेकंड के लिए उस दिशा में अपनी दृष्टि बनाए रखें।
  • इसे तीन से पांच मिनट तक दोहराएं।
  • अब अपनी दृष्टि के क्रम को उलट दें और इसे तीन से पांच मिनट तक दोहराएं।

शवासन

यह आंखों की एक्सरसाइज़ में किये जाने वाला वही पलक झपकाना और हाथ फेरना है। इसके साथ ही धीरे-धीरे सांस लेने और छोड़ने के साथ अगल-बगल की आंखों की गति बदलना। आंखों की एक्सारसाइज़ की तरह व्यक्ति को आंखों को एक तरफ से दूसरी तरफ घुमाना चाहिए। योग और एक्सरसाइज़ में सिर्फ इतना ही अंतर है कि ऊपर देखते वक्त सांस लेना और नीचे देखते वक्त सांस छोड़ना चाहिए। इसी तरह खुद से दूर देखते हुए सांस लें और खुद की तरफ देखते हुए सांस छोड़ें।

आंखों का योग आंखों के आराम पर जोर देता है और आपको किसी भी तरह की एक्सरसाइज़ करते वक्त सांस लेने जैसे ज़रूरी कामों के बारे में जागरूक होने के लिए प्रोत्साहित करता है। सभी एक्सरसाइज़ पूरी होने के बाद मांसपेशियों को आराम देने के लिए आपको शवासन में लेटने के लिए कहा जाता है, जो योगा में शामिल थी। बेहतर नतीज़ों के लिए किसी प्रशिक्षित गुरु से योग सीखना चाहिए। ग्लूकोमा से पीड़ित लोगों को शीर्ष-आसन जैसी कुछ योग मुद्राएं नहीं करने की सलाह दी जाती है।

एक्सरसाइज़ और योगा से आंखों को लाभ – Exercise Aur Yoga Se Aankhon Ko Labh

भले ही दृष्टि दोष जेनेटिक और आंख में कुछ संरचनाओं के बदलाव की वजह से हो सकता है, लेकिन इसके कुछ पर्यावरणीय कारण भी हो सकते हैं। एक्सरसाइज़ और योग से आंखों में संरचनात्मक बदलाव को ठीक नहीं किया जा सकता, लेकिन आंखों के तनाव और थकान जैसे पर्यावरणीय कारकों में आंखों की एक्सरसाइज़ से काफी फायदा हो सकता है। आंखों की एक्सरसाइज़ के काम करने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, जिसकी वजह से आपका नेत्र चिकित्सक ज्यादातर इन्हें करने की सलाह नहीं देता। एक्सरसाइज़ के बजाय चिकित्सक चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस की सलाह देना पसंद करते हैं।

हालांकि आंखों के योग को दृष्टि में सुधार और चश्मे से छुटकारे का असरदार तरीके के तौर पर नहीं बताया गया, लेकिन फिर भी कुछ लोग कुछ हद तक दृष्टि में सुधार की उम्मीद के साथ इसकी प्रेक्टिस करते हैं। ज़्यादातर योग शिक्षक सांस लेने की तकनीक या विश्राम तकनीक का सुझाव देते हैं। इनमें से कई व्यक्तिगत पुष्टि और आपकी दृष्टि के दृश्य की सलाह भी देते हैं। इसका मतलब दिन में कई बार अपने आप को यह बताना है कि आपको वास्तव में चश्मे की ज़रूरत नहीं है और बिना चश्मे या कॉन्टैक्ट लेंस के बिना पूरी तरह से देख सकते हैं। आपके योग शिक्षक आपसे कभी भी चश्मे के इस्तेमाल को पूरी तरह से बंद करने के लिये नहीं कहेंगे, क्योंकि कुछ योग मुद्राओं का आपकी आंखों पर प्रतिकूल असर हो सकता है, जैसे ग्लूकोमा। इस प्रशिक्षण के बारे में अपने नेत्र चिकित्सक से ठीक से चर्चा करके ही ऐसा करें। 

निष्कर्ष – Nishkarsh

आपके लिए अपनी आंखों के इलाज का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने आंखों के डॉक्टर या आई केयर प्रोफेशनल के पास जाएं और नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच करवाएं। वह आपकी आंखों की बीमारी के इलाज के सबसे बेहतर तरीके के बारे में आपको बताएंगे और गाइड करेंगे। 

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