सफेद दाने/फुंसी (मिलिया) क्या हैं? What is Milia Bumps?
पलकों और आंखों के नीचे दिखने वाले छोटे सफेद या पीले दाने अक्सर मिलिया होते हैं। ये त्वचा की ऊपरी परत के नीचे केराटिन (त्वचा का एक प्रोटीन) फंस जाने से बनते हैं। मिलिया पर त्वचा में कोई छेद नहीं होता, इसलिए ये मुंहासे की तरह फूटते नहीं हैं।
मिलिया नवजात शिशुओं में बहुत आम हैं, लेकिन किसी भी उम्र के लोगों को हो सकते हैं। ये आमतौर पर दर्द या नुकसान नहीं करते, पर चेहरे पर दिखने की वजह से कई लोग इन्हें हटाना चाहते हैं। पलकों के आसपास की त्वचा बहुत नाज़ुक होती है, इसलिए इन्हें खुद हटाने की कोशिश करना सुरक्षित नहीं है। इस लेख में हम इनके प्रकार, कारण, सुरक्षित देखभाल और इलाज के विकल्प समझाएंगे।

सफेद दानों के प्रकार – Types of Milia Bumps
यह सफेद दाने कई प्रकार के हो सकते हैं, जैसेः
नियोनेटल मिलिया
यह आमतौर पर नाक पर पाए जाते, हैं लेकिन यह चेहरे, सिर और मुंह के अंदर भी देखे जा सकते हैं। अक्सर नियोनेटल मिलिया और नियोनेटल एक्ने को पहचान पाना मुश्किल होता है। हालांकि नियोनेटल एक्ने आकार में अलग हो सकते हैं और आमतौर पर लाल होते हैं, जबकि नियोनेटल मिलिया आकार में समान होते हैं जिनमें कोई लालपन नहीं होता। नियोनेटल मिलिया नवजात शिशुओं में पाई जाने वाली एक आम बीमारी है, जबकि नियोनेटल एक्ने जन्म के दो हफ्ले बाद होते हैं।
प्राइमरी मिलिया
यह बच्चों और वयस्कों दोनों में हो सकता है और कई हफ्तों या महीनों तक रह सकता है। आमतौर पर यह पलकों, गाल और माथे पर दिखाई देता है।
मिलिया ईएन प्लाक
इसमें कई सफेद दाने या फुंसियां आसपास की त्वचा पर एक बड़ा फ्लैट पैच बनाती हैं। यह बच्चों और वयस्कों दोनों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन आमतौर पर यह मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं में पाया जाता है। पलकों, कान के पीछे या गालों पर बनने वाली यह सफेद फुंसियां बहुत दुर्लभ प्रकार का मिलिया है, जो लाइकेन प्लेनस या डिस्कोइड ल्यूपस एरिथेमैटोसस जैसी अन्य त्वचा की समस्याओं से भी जुड़ा हो सकता है।
ट्रॉमेटिक मिलिया
इस प्रकार के सफेद दानों या फुंसियों को सेकेंडरी मिलिया के रूप में जाना जाता है। यह त्वचा की चोट के बाद होता है, जिसमें शामिल हैं:
- जलन
- त्वचा पर छाले
- एलर्जी से रिएक्शन
मिलिया के कारण और जोखिम कारक – Causes and Risk Factors of Milia
मिलिया आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होते। ये तब बनते हैं जब मृत त्वचा कोशिकाएं या केराटिन त्वचा के नीचे फंस जाता है और बाहर नहीं निकल पाता।
इन स्थितियों में मिलिया होने की संभावना बढ़ सकती है:
- त्वचा की चोट, जैसे जलना, छाले पड़ना या एलर्जी वाले दाने (इन्हें सेकेंडरी या ट्रॉमेटिक मिलिया कहते हैं)
- धूप से त्वचा को नुकसान
- लंबे समय तक स्टेरॉयड क्रीम का इस्तेमाल, खासकर चेहरे पर
- कुछ कॉस्मेटिक प्रक्रियाएं या स्किन ट्रीटमेंट के बाद त्वचा ठीक होते समय
- कुछ मामलों में भारी, चिकनी क्रीम का आंखों के आसपास इस्तेमाल
- नवजात शिशुओं में त्वचा की ग्रंथियों का अभी पूरी तरह विकसित न होना
सफेद दानों की सही पहचान ज़रूरी है, क्योंकि मुंहासे, चालाज़ियन, ज़ैन्थेलाज़्मा और सिरिंगोमा जैसी स्थितियां भी मिलिया जैसी दिख सकती हैं। अगर दाने किसी चोट या त्वचा की दूसरी बीमारी से जुड़े हों, तो उसका अलग से इलाज करवाना चाहिए, वरना मिलिया दोबारा आ सकते हैं।
घर पर क्या करें और क्या न करें – What to Do and What Not to Do at Home
ज़्यादातर मिलिया को इलाज की ज़रूरत नहीं होती और वे समय के साथ अपने आप चले जाते हैं। नवजात शिशुओं में ये अक्सर कुछ हफ्तों में साफ हो जाते हैं। बड़ों में इन्हें जाने में हफ्तों से महीनों तक लग सकते हैं, और कुछ मामलों में ये टिके भी रहते हैं।

घर पर ये करना सुरक्षित है:
- चेहरे को रोज़ हल्के, सुगंध-रहित क्लींज़र और गुनगुने पानी से धीरे से साफ करें।
- बाहर निकलते समय सनस्क्रीन (SPF 30 या ज़्यादा) लगाएं, क्योंकि धूप से त्वचा को नुकसान मिलिया का एक कारण हो सकता है।
- आंखों के आसपास हल्के, गैर-चिकने (non-comedogenic) प्रोडक्ट इस्तेमाल करें।
- धैर्य रखें और दानों को अकेला छोड़ दें।
घर पर ये बिल्कुल न करें:
- दानों को दबाएं, खुरचें या सुई से न फोड़ें। मिलिया के ऊपर कोई छेद नहीं होता, इसलिए इससे कुछ नहीं निकलता, बस त्वचा को नुकसान, संक्रमण और स्थायी निशान का खतरा रहता है।
- पलकों के पास कपड़े या स्क्रब से रगड़ें नहीं। पलकों की त्वचा बहुत पतली होती है।
- पलकों के पास शहद, गुलाब जल या दूसरे घरेलू नुस्खे न लगाएं। इनसे जलन, एलर्जी या संक्रमण हो सकता है।
- बिना डॉक्टर की सलाह के रेटिनॉयड (विटामिन ए) क्रीम या जेल न खरीदें और न पलकों या आंख के बहुत पास लगाएं। ये पलकों की त्वचा पर जलन कर सकते हैं।
चिकित्सा उपचार – Medical Treatment
अगर मिलिया परेशान कर रहे हैं, कई महीनों तक नहीं जा रहे, या आप उन्हें कॉस्मेटिक कारणों से हटवाना चाहते हैं, तो इन्हें त्वचा रोग विशेषज्ञ (डर्मेटोलॉजिस्ट) या ऑक्यूलोप्लास्टी विशेषज्ञ से हटवाना सबसे सुरक्षित है। पलकों के पास की त्वचा नाज़ुक होती है, इसलिए यह प्रक्रिया अनुभवी डॉक्टर को ही करनी चाहिए।
आम तरीके:
- एक्सट्रैक्शन (डीरूफिंग): डॉक्टर साफ और स्टेरिलाइज़्ड सुई या ब्लेड से दाने के ऊपर बहुत छोटा चीरा लगाकर अंदर फंसा केराटिन निकाल देते हैं। यह कुछ मिनटों का काम है।
- क्रायोथेरेपी: लिक्विड नाइट्रोजन से दाने को जमाकर नष्ट किया जाता है।
- लेज़र: छोटे लेज़र से दाने को खोलकर केराटिन निकाला जाता है। पलकों के पास लेज़र में आंख की सुरक्षा का खास ध्यान रखा जाता है।
- दवा वाली क्रीम: कुछ मामलों में त्वचा रोग विशेषज्ञ रेटिनॉयड क्रीम सुझाते हैं, लेकिन पलकों और आंख के बहुत पास इनका इस्तेमाल आमतौर पर सावधानी से और डॉक्टर की देखरेख में ही होता है।
प्रक्रिया के बाद: कुछ दिनों तक हल्की लालिमा हो सकती है। उस जगह को साफ रखें, धूप से बचाएं और डॉक्टर की दी सलाह मानें। मिलिया अगर किसी त्वचा की बीमारी या चोट से जुड़े हैं, तो उसका इलाज साथ में करवाना ज़रूरी है, ताकि वे दोबारा न आएं।
रोकथाम – Prevention
नवजात शिशुओं में होने वाले मिलिया को रोका नहीं जा सकता। बड़ों में इन्हें कम करने के लिए ये बातें मदद कर सकती हैं:
- धूप के ज़्यादा संपर्क से बचें और रोज़ सनस्क्रीन लगाएं
- चेहरे को नियमित रूप से हल्के क्लींज़र से धीरे से साफ करें
- आंखों के आसपास भारी या बहुत चिकनी क्रीम की जगह हल्के, गैर-चिकने प्रोडक्ट चुनें
- चेहरे पर लंबे समय तक स्टेरॉयड क्रीम सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही लगाएं
- अगर मिलिया किसी त्वचा की बीमारी या चोट से जुड़े हैं, तो उसका सही इलाज करवाएं
- दानों को कभी न दबाएं और न खुरचें

मिलिया हमारे शरीर के कई हिस्सों जैसे गाल, पलकों और नाक पर बनने वाली एक पीली या सफेद गांठ होती है। यह लंबे समय तक होने वाली समस्याओं का कारण नहीं बनते हैं और ज़्यादातर मामलों में इन्हें कुछ हफ्तों के अंदर बिना उपचार के ठीक किया जा सकता है। वयस्कों और बच्चों की तुलना में नवजात शिशुओं में बनने वाले मिलिया बंप जल्दी गायब हो जाते हैं। अगर कई हफ्तों के बाद भी यह सफेद दाने ठीक नहीं होते, तो डॉक्टर से परामर्श करें, क्योंकि कभी-कभी यह त्वचा की अन्य स्थितियों या चोट से जुड़ा होता है। कई घरेलू उपचार के माध्यम से आप सफेद दानों का इलाज करके अपनी त्वचा को स्वस्थ रख सकते हैं।
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निष्कर्ष – Conclusion
पलकों पर सफेद दाने ज़्यादातर मिलिया होते हैं, जो हानिरहित हैं और अक्सर अपने आप चले जाते हैं। इन्हें खुद दबाने, रगड़ने या घरेलू नुस्खे लगाने से बचें, क्योंकि पलकों की त्वचा बहुत नाज़ुक होती है। अगर दाने परेशान कर रहे हैं, लंबे समय तक नहीं जा रहे, या वे मिलिया जैसे नहीं दिख रहे, तो जांच करवाएं।
पलकों पर सफेद दाने या आंखों की किसी भी समस्या के लिए आप दिल्ली में आई मंत्रा हॉस्पिटल में नेत्र विशेषज्ञों से सलाह ले सकते हैं। अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए +91-9711115191 पर कॉल करें या eyemantra1@gmail.com पर मेल करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
उत्तर: मिलिया छोटे, सफेद या पीले दाने हैं, जो त्वचा के नीचे केराटिन फंसने से बनते हैं। ये हानिरहित होते हैं और अक्सर पलकों, गालों और नाक पर दिखते हैं।
उत्तर: बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं। पलकों की त्वचा बहुत नाज़ुक होती है और रेटिनॉयड से जलन हो सकती है। त्वचा रोग विशेषज्ञ से पूछकर ही इसका इस्तेमाल करें।उत्तर: नहीं। मिलिया आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होते और एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलते।
उत्तर: नहीं। मिलिया आमतौर पर नुकसानदायक नहीं होते और एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलते।
उत्तर: अक्सर हां। नवजात शिशुओं में ये कुछ हफ्तों में चले जाते हैं। बड़ों में इन्हें जाने में हफ्तों से महीनों लग सकते हैं, और कुछ मामलों में ये टिके रहते हैं।
उत्तर: नहीं। मिलिया के ऊपर त्वचा में कोई छेद नहीं होता, इसलिए दबाने से कुछ नहीं निकलता और त्वचा को नुकसान, संक्रमण या निशान हो सकता है। पलकों के पास यह खतरा और बढ़ जाता है, इसलिए इन्हें डॉक्टर से हटवाएं।
उत्तर: मिलिया छोटे, सख्त, सफेद दाने होते हैं। ज़ैन्थेलाज़्मा पीले, चपटे और नरम धब्बे होते हैं, जो त्वचा के नीचे कोलेस्ट्रॉल जमने से बनते हैं। ज़ैन्थेलाज़्मा दिखे तो कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाना अच्छा रहता है।
उत्तर: त्वचा रोग विशेषज्ञ या ऑक्यूलोप्लास्टी विशेषज्ञ इन्हें सुरक्षित रूप से हटा सकते हैं, आमतौर पर कुछ मिनटों में। इसके लिए एक्सट्रैक्शन, क्रायोथेरेपी या लेज़र जैसे तरीके इस्तेमाल होते हैं।

