आंखों की देखभाल कैसे करें? Aankhon Ki Dekhbhal Kaise Karein?
आज स्मार्टफोन, कंप्यूटर और टीवी स्क्रीन के लंबे इस्तेमाल से आंखों की थकान, सूखापन और जलन की समस्या आम हो गई है। बच्चों में भी स्क्रीन के ज़्यादा इस्तेमाल से आंखों की परेशानी बढ़ रही है।आंखों की रोज़ की देखभाल में हमारी आदतें बड़ी भूमिका निभाती हैं। इस लेख में हम 12 आसान और सुरक्षित आंखों की देखभाल के घरेलू उपचार बता रहे हैं, जो आंखों की थकान घटाने और आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। साथ ही हम बताएंगे कि आंखों में कौन सी चीज़ें कभी नहीं डालनी चाहिए और डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए। ध्यान रखें कि घरेलू उपाय देखभाल में मदद करते हैं, लेकिन आंख की बीमारी का इलाज नहीं हैं।

आंखों की देखभाल के लिए 12 घरेलू उपाय – Aankhon Ki Dekhbhal Ke Liye 12 Gharelu Upay
आंखों की देखभाल (Eye Care) के लिए कुछ घरेलू उपाय निम्नलिखित हैं, जिनकी मदद से आप अपनी आंखों के स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं, जैसे-
1. रोज़ अपनी आंखें धोएं

रोज़ चेहरे और पलकों के बाहरी हिस्से को साफ गुनगुने पानी से धोएं, ताकि धूल और गंदगी जमा न हो। आंखें बंद रखकर चेहरे पर पानी के छींटे मारना ठीक है।
आंखों के अंदर घर पर बना कोई घोल, काढ़ा या पानी में भिगोया हुआ चूर्ण (जैसे त्रिफला का पानी) न डालें। घर पर बनी चीज़ें स्टेराइल नहीं हो सकतीं, और इनसे जलन या संक्रमण का खतरा रहता है। अगर आंख में धूल या कचरा चला जाए, तो साफ बहते पानी या दवा की दुकान पर मिलने वाले स्टेराइल सलाइन आई वॉश से धीरे से धोएं। जलन या लाली कुछ घंटों में कम न हो, तो डॉक्टर को दिखाएं।
2. 20-20-20 नियम अपनाएं और पलकें झपकाएं
स्क्रीन पर काम करते समय हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट (करीब 6 मीटर) दूर किसी चीज़ को देखें। साथ ही जान-बूझकर बार-बार पलकें झपकाएं। स्क्रीन देखते समय हम सामान्य से कम पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखें सूखती हैं और थकती हैं। यह डिजिटल आई स्ट्रेन से बचाव का सबसे आसान और असरदार तरीका है।
3. आंखों की आसान एक्सरसाइज़ करें

आंखों को धीरे-धीरे ऊपर-नीचे, बाएं-दाएं और गोल घुमाएँ। इसे घड़ी की दिशा में और उसके उलट 3-4 बार दोहराएं। एक और आसान एक्सरसाइज़ में पहले पास की चीज़ (जैसे अंगूठे) को 10-15 सेकंड देखें, फिर दूर की चीज़ को।
ये एक्सरसाइज़ आंखों की थकान और तनाव कम करने में मदद कर सकती हैं। लेकिन ये चश्मे का नंबर नहीं हटातीं और नज़र कमज़ोर होना नहीं रोकतीं। बच्चों के लिए रोज़ कुछ समय बाहर धूप में खेलना ज़्यादा फायदेमंद है, क्योंकि इससे नज़र कमज़ोर होने की रफ्तार कम हो सकती है।
और एक्सरसाइज़ के लिए पढ़ें: दृष्टि सुधार के लिए आंखों की एक्सरसाइज़ और योग
4. पाल्मिंग से आंखों को आराम दें
दोनों हथेलियों को करीब 30 सेकंड तक आपस में रगड़कर गर्म करें। फिर आंखें बंद करके हथेलियों को हल्के से आंखों पर रखें, बिना दबाए। एक मिनट तक गहरी सांस लेते हुए आराम करें। फिर धीरे-धीरे आंखें खोलें और कुछ पल तक सीधे तेज़ रोशनी की तरफ न देखें। इसे दिन में 2-3 बार करने से आंखों की थकान में राहत मिलती है।
5. आंखों के लिए अच्छा खानपान
संतुलित खानपान आंखों को स्वस्थ रखने में मदद करता है। इन चीज़ों को अपने भोजन में शामिल करें:
- पालक, ब्रोकली और दूसरी हरी पत्तेदार सब्ज़ियां
- गाजर, शकरकंद, पपीता और दूसरी पीली-नारंगी सब्ज़ियां और फल (विटामिन ए)
- संतरा, नींबू और आंवला जैसे खट्टे फल (विटामिन सी)
- बादाम, अखरोट और बीज (विटामिन ई और ओमेगा-3)
- दालें और फलियां, अंडे, और अगर आप मछली खाते हैं तो मछली
संतुलित खानपान आंखों की सेहत में मदद करता है, लेकिन यह आंख की बीमारियों का इलाज नहीं है। कोई भी सप्लीमेंट डॉक्टर की सलाह पर ही लें।
विस्तार से पढ़ें: [स्वस्थ आंखों के लिए आहार और पोषण]
6. UV वाला धूप का चश्मा पहनें
तेज़ धूप में बाहर निकलते समय धूप का चश्मा पहनें। लंबे समय तक सूरज की UV किरणों के संपर्क में रहने से मोतियाबिंद और आंखों की दूसरी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। चश्मा खरीदते समय उस पर “UV400” या “100% UV प्रोटेक्शन” लिखा देखें। सिर्फ गहरा रंग काफी नहीं है। सीधे सूरज को कभी न देखें।
7. गंदे हाथों से आंखों को न छुएं

गंदे हाथों से आंखों को छूने से धूल और कीटाणु आंखों तक पहुंच सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा रहता है। आंखों को छूने से पहले हाथ साबुन से धोएं। आंखों को ज़ोर से न रगड़ें, क्योंकि इससे लाली, सूजन और जलन बढ़ सकती है। अगर आंख में धूल चली जाए, तो रगड़ने की जगह साफ बहते पानी या स्टेरिल सलाइन से धोएं।
8. परिवार का नेत्र इतिहास जानें और नियमित जांच करवाएं
ग्लूकोमा, रेटिना की कुछ बीमारियां और उम्र से जुड़ी मैक्युलर डिजेनरेशन जैसी कई आंखों की बीमारियां परिवार में चल सकती हैं। अगर आपके परिवार में किसी को आंखों की समस्या रही है, तो डॉक्टर को ज़रूर बताएं। आमतौर पर हर 1 से 2 साल में आंखों की जांच करवाना अच्छा रहता है। डायबिटीज़ या परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास हो, तो डॉक्टर के बताए अनुसार जांच करवाएं। कई बीमारियों में शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखता, इसलिए जांच ज़रूरी है।
9. पूरी नींद लें
अच्छी नींद आंखों को आराम देती है और उनकी थकान, जलन और सूखेपन को कम करने में मदद करती है। ज़्यादातर वयस्कों को रोज़ 7 से 8 घंटे की नींद चाहिए। सोने से पहले स्क्रीन देखना कम करें और कुछ मिनट शांत बैठें या ध्यान करें, इससे अच्छी नींद आने में मदद मिलती है।
10. थकी आंखों के लिए ठंडा सेक
थकी, भारी या सूजी हुई आंखों को आराम देने के लिए एक साफ कपड़ा ठंडे पानी में भिगोकर निचोड़ें और बंद पलकों पर 5 से 10 मिनट रखें। आंख पर दबाव न डालें।
गुलाब जल को सीधे आंखों में न डालें। आम गुलाब जल स्टेराइल नहीं होता और इससे जलन, एलर्जी या आंख का संक्रमण हो सकता है। चाहें तो शुद्ध गुलाब जल में भिगोया रुई का फोहा बंद पलकों पर रखकर ठंडक ले सकते हैं, लेकिन इसे आंख के अंदर न जाने दें। यह सिर्फ आराम देता है और काले घेरों का पक्का इलाज नहीं है। काले घेरे नींद की कमी, एलर्जी या आनुवंशिक कारणों से भी हो सकते हैं। अगर रुई लगाने पर जलन हो, तो तुरंत बंद करें।
एक अपवाद: बाज़ार में कुछ स्टेराइल आईड्रॉप्स (ऑप्थैल्मिक ड्रॉप्स) मिलती हैं, जिनमें गुलाब का अर्क होता है। इन्हें तभी इस्तेमाल करें जब पैक पर साफ लिखा हो कि वह आंखों के लिए बनी है, वह आपके देश में मान्य (अप्रूव्ड) हो, और आपके डॉक्टर ने उसकी सलाह दी हो। रसोई या सौंदर्य वाला आम गुलाब जल इस श्रेणी में नहीं आता।
11. स्क्रीन के लिए सही चश्मा और सेटिंग
अगर आप कई घंटे स्क्रीन पर काम करते हैं और आंखें थकती हैं, तो पहले आंखों की जांच करवाएं। कभी-कभी चश्मे का नंबर सही न होने या स्क्रीन की दूरी के हिसाब से नंबर न होने से थकान ज़्यादा होती है। डॉक्टर ज़रूरत पड़ने पर स्क्रीन के लिए नंबर वाला चश्मा लिख सकते हैं। यह नंबर वाला चश्मा है, ब्लू-लाइट फिल्टर वाला चश्मा नहीं।
साथ में ये सेटिंग रखें:
- स्क्रीन आंखों के लेवल से थोड़ी नीचे और लगभग हाथ भर की दूरी (50 से 70 सेमी) पर रखें
- कमरे की रोशनी के हिसाब से स्क्रीन की ब्राइटनेस रखें
- स्क्रीन पर चमक या रिफ्लेक्शन न पड़े
विस्तार से पढ़ें: आई स्ट्रेन को कैसे रोकें
12. आंखों के आसपास हल्की मालिश
आंखों के आसपास की हड्डी की हल्की मालिश से आंखों के भारीपन और तनाव में आराम मिल सकता है। उंगलियों के पोरों से भौंहों की हड्डी, कनपटी और नाक के पास की हड्डी के आसपास हल्के गोल घेरे बनाएं। इसे करीब एक मिनट तक करें।
आंख के गोले (आईबॉल) पर कभी न दबाएं और न रोल करें। अगर आपको ग्लूकोमा या रेटिना की कोई समस्या है, या हाल में आंख की सर्जरी हुई है, तो मालिश करने से पहले डॉक्टर से पूछें।
आंखों में ये चीज़ें कभी न डालें
आंखें बहुत नाज़ुक होती हैं। घर पर मिलने वाली चीज़ें, चाहे प्राकृतिक हों, आंखों के लिए स्टेराइल नहीं होतीं और इनसे जलन, एलर्जी या संक्रमण हो सकता है। इन्हें आंखों में न डालें:
- गुलाब जल
- शहद
- नींबू का रस
- घी, तेल या कोई घरेलू लेप
- घर पर बना काढ़ा, चूर्ण का पानी या कोई घोल
- पुरानी आईड्रॉप्स, या बिना डॉक्टर की सलाह वाली आईड्रॉप्स
आंखों में सिर्फ वही आईड्रॉप्स डालें जो डॉक्टर ने बताए हों। ड्राई आइज़ के लिए सही आईड्रॉप्स चुनने में मदद के लिए पढ़ें: [ड्राई आइज़ के लिए आईड्रॉप्स]
डॉक्टर को कब दिखाएँ?
घरेलू उपाय सिर्फ हल्की थकान और असुविधा के लिए हैं। इन स्थितियों में घरेलू उपाय में समय न लगाएं और नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएं:
- आंख में तेज़ दर्द हो
- अचानक धुंधला दिखे या दृष्टि कम हो जाए
- रोशनी की चमक या अचानक नए फ्लोटर्स (तैरते धब्बे) दिखें। यह रेटिना की आपात स्थिति का संकेत हो सकता है, इसलिए उसी दिन जांच करवाएं।
- आंख में चोट लगे, या केमिकल चला जाए (ऐसे में पहले साफ बहते पानी से कई मिनट तक धोएं और फिर तुरंत डॉक्टर के पास जाएं)
- आंख से गाढ़ा पीला या हरा स्राव निकले, या पलकें चिपकें
- आंख लाल रहे और तेज़ रोशनी चुभे, या लाली 1-2 दिन में कम न हो
- कॉन्टैक्ट लेंस पहनने पर आंख लाल और दर्द भरी हो
- एक आंख में अचानक सूजन या दर्द हो
लाल आंखों और पिंक आई के बारे में पढ़ें: रेड आईज़ के लिए घरेलू उपचार और पिंक आई के लिए घरेलू उपचार
निष्कर्ष – Nishkarsh
आंखों की समस्याएं मामूली से लेकर गंभीर तक हो सकती हैं। आंख की मामूली समस्या के मामले में आप लक्षणों को खराब होने से बचाने और गंभीर समस्या का कारण बनने के लिए विभिन्न आंखों की देखभाल के घरेलू उपचारों को आजमा सकते हैं।
अपनी आंखों का इलाज कराने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने आंखों के डॉक्टर के पास जाएं और नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच करवाएं। वह आपकी आंखों की बीमारी के इलाज के बेहतर तरीके का आकलन करने में सक्षम होंगे।
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FAQs
उत्तर: सबसे आसान और असरदार उपाय हैं 20-20-20 नियम, स्क्रीन देखते समय बार-बार पलकें झपकाना, पूरी नींद, संतुलित खानपान, UV वाला धूप का चश्मा और गंदे हाथों से आंखों को न छूना।
उत्तर: आम गुलाब जल को आंखों में न डालें। यह स्टेराइल नहीं होता और इससे जलन, एलर्जी या संक्रमण हो सकता है। एक अपवाद है: गुलाब के अर्क वाली ऐसी स्टेराइल आईड्रॉप्स, जिन पर साफ लिखा हो कि वे आंखों के लिए बनी हैं, जो आपके देश में मान्य (अप्रूव्ड) हों और जिन्हें डॉक्टर ने सुझाया हो। थकी आंखों के लिए बंद पलकों पर ठंडा साफ कपड़ा रखना सुरक्षित है।
उत्तर: चेहरे और बंद पलकों को साफ पानी से धोना ठीक है। आंखों के अंदर घर पर बना कोई घोल या काढ़ा न डालें। आंख में धूल चली जाए तो साफ बहते पानी या स्टेराइल सलाइन से धोएं।
उत्तर: नहीं। एक्सरसाइज़ आंखों की थकान और तनाव कम करने में मदद करती हैं, लेकिन वे चश्मे का नंबर नहीं हटातीं। नंबर के लिए चश्मा, कॉन्टैक्ट लेंस या लेज़र सर्जरी जैसे विकल्प हैं।
उत्तर: हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट (करीब 6 मीटर) दूर किसी चीज़ को देखें। इससे स्क्रीन देखने से आंखों पर पड़ने वाला ज़ोर कम होता है।
उत्तर: पालक जैसी हरी सब्ज़ियां, गाजर और शकरकंद, खट्टे फल, बादाम और अखरोट, दालें, अंडे और (अगर खाते हैं) मछली आंखों की सेहत में मदद करते हैं। यह संतुलित खानपान आंख की बीमारी का इलाज नहीं है।
उत्तर: ऐसा चश्मा चुनें जिस पर “UV400” या “100% UV प्रोटेक्शन” लिखा हो। सिर्फ गहरे रंग के शीशे काफी नहीं होते।
उत्तर: आमतौर पर हर 1 से 2 साल में आंखों की जांच करवाना अच्छा रहता है। डायबिटीज़ हो, परिवार में ग्लूकोमा का इतिहास हो या चश्मा लगता हो, तो डॉक्टर के बताए अनुसार जांच करवाएं।

