नेत्रदान क्या है? Netradaan Kya Hai?
नेत्रदान का मतलब है मृत्यु के बाद अपनी आंखें (कॉर्निया) किसी ऐसे व्यक्ति के लिए दान करना, जिसकी रोशनी कॉर्निया की खराबी की वजह से चली गई हो। कॉर्निया आंख की सबसे बाहरी, पारदर्शी परत है। जब यह चोट, संक्रमण या बीमारी से धुंधली या खराब हो जाती है, तो कॉर्निया ट्रांसप्लांट से रोशनी लौट सकती है। एक दाता की दो आंखों से आमतौर पर दो लोगों को रोशनी मिल सकती है।
नेत्रदान सिर्फ मृत्यु के बाद हो सकता है और इसमें समय बहुत मायने रखता है। इस लेख में हम बताएंगे कि कौन नेत्रदान कर सकता है, मृत्यु के बाद तुरंत क्या करना चाहिए, प्रक्रिया कैसे होती है और नेत्रदान की शपथ कैसे लें।
राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा हर साल 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जाता है, ताकि लोगों में नेत्रदान की जागरूकता बढ़े।
आँख का कौन सा हिस्सा दान किया जाता है? Aankh Ka Kaun Sa Hissa Daan Kiya Jaata Hai?
नेत्रदान में ट्रांसप्लांट के लिए सिर्फ कॉर्निया (आंख की सबसे बाहरी पारदर्शी परत) इस्तेमाल होता है। पूरी आंख का ट्रांसप्लांट नहीं हो सकता।
कई लोग डरते हैं कि नेत्रदान के बाद चेहरा बिगड़ जाएगा। ऐसा नहीं है। प्रक्रिया के बाद पलकें बंद कर दी जाती हैं और चेहरा सामान्य दिखता है।
जो आंखें ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त नहीं निकलतीं, उन्हें मेडिकल रिसर्च और डॉक्टरों की पढ़ाई में इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे आंखों की बीमारियों को समझने और नए इलाज खोजने में मदद मिलती है।
नेत्रदान कौन कर सकता है? Netradaan Kaun Kar Sakta Hai?
नेत्रदान सिर्फ मृत्यु के बाद हो सकता है। जीवित रहते हुए आप अपनी आंखें दान नहीं कर सकते, लेकिन नेत्रदान का संकल्प (शपथ) ज़रूर ले सकते हैं। यह फैसला पूरी तरह स्वैच्छिक है।
शपथ लेने के बाद भी, मृत्यु के समय परिवार (निकटतम रिश्तेदार) की सहमति ज़रूरी होती है। इसलिए अपने परिवार को अपने फैसले के बारे में ज़रूर बताएं। अगर किसी ने शपथ नहीं ली थी, तब भी परिवार चाहे तो मृतक की आंखें दान करने की अनुमति दे सकता है।
इन लोगों के नेत्रदान में कोई रुकावट नहीं है:
- किसी भी लिंग और किसी भी धर्म के लोग
- आमतौर पर कोई ऊपरी आयु सीमा नहीं है। आंख ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त है या नहीं, यह आई बैंक की टीम जांचती है।
- चश्मा पहनने वाले लोग (निकट दृष्टिदोष, दूरदृष्टि दोष या दृष्टिवैषम्य)
- मोतियाबिंद सर्जरी करवा चुके लोग
- डायबिटीज़ या हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग
क्या आंख की सर्जरी हुई हो तो नेत्रदान हो सकता है?
मोतियाबिंद की सर्जरी करवा चुके लोग नेत्रदान कर सकते हैं। लेसिक जैसी रिफ्रैक्टिव सर्जरी के बाद कॉर्निया का आकार बदल जाता है, इसलिए ऐसी कॉर्निया आमतौर पर ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त नहीं मानी जाती, लेकिन उसे रिसर्च और पढ़ाई में इस्तेमाल किया जा सकता है। अंतिम फैसला आई बैंक की मेडिकल टीम करती है।
नेत्रदान कौन नहीं कर सकता?
इन स्थितियों में आमतौर पर नेत्रदान ट्रांसप्लांट के लिए नहीं हो पाता:
- एड्स (HIV)
- हेपेटाइटिस बी या सी
- रेबीज़
- सेप्टिसीमिया (खून में गंभीर संक्रमण)
- तीव्र ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर)
- टेटनस और हैजा
- मेनिनजाइटिस और एन्सेफलाइटिस जैसे संक्रामक रोग
अंतिम फैसला आई बैंक की मेडिकल टीम करती है। अगर आपको कोई शंका हो, तो आई बैंक से बात करें।
नेत्रदान की शपथ कैसे लें?
नेत्रदान की शपथ लेना आसान है और इसके लिए कोई पैसा नहीं लगता। आप ऑनलाइन फॉर्म भरकर या अपने नज़दीकी नेत्र बैंक में जाकर फॉर्म भरकर शपथ ले सकते हैं। शपथ पूरी होने पर आमतौर पर आपको एक शपथ कार्ड (डोनर कार्ड) या डिजिटल प्रमाणपत्र मिलता है।
ऑनलाइन शपथ लेने के तरीके:
- सरकारी ऑनलाइन प्रतिज्ञा पोर्टल: “MyGov Eye Donation Pledge” भारत सरकार के ऑनलाइन प्रतिज्ञा पोर्टल पर नेत्रदान का फॉर्म भरें
- आई बैंक या नेत्र अस्पताल की वेबसाइट: आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया (EBAI) या किसी पंजीकृत नेत्र बैंक या नेत्र अस्पताल की वेबसाइट पर भी शपथ फॉर्म मिल जाता है [VERIFY: EBAI लिंक]।
- जानकारी भरें: अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर और परिवार के एक सदस्य का संपर्क नंबर लिखें, फिर फॉर्म जमा करें।
- प्रमाणपत्र सुरक्षित रखें: अगर प्रमाणपत्र या डोनर कार्ड मिले, तो उसे डाउनलोड या सेव करके रखें और परिवार के साथ साझा करें।
ऑफलाइन शपथ लेने के तरीके:
- नेत्र बैंक से संपर्क करें: अपने नज़दीकी पंजीकृत नेत्र बैंक या नेत्र अस्पताल जाएं या उन्हें फोन करें। नज़दीकी आई बैंक का पता लगाने के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1919 (टोल-फ्री) पर भी फोन कर सकते हैं
- फॉर्म भरें: वहां से शपथ फॉर्म लेकर उसमें अपनी जानकारी भरें।
- फॉर्म जमा करें: फॉर्म जमा करने के बाद नेत्र बैंक आमतौर पर आपको एक कार्ड या प्रमाणपत्र देता है। इसे संभालकर रखें।
ध्यान रखने योग्य बातें:
- परिवार को ज़रूर बताएं। नेत्रदान परिवार का फैसला भी है। मृत्यु के समय आई बैंक की टीम परिवार से सहमति लेती है, इसलिए परिवार को आपकी इच्छा पता होनी चाहिए।
- कार्ड न हो तब भी नेत्रदान हो सकता है। शपथ कार्ड हमेशा ज़रूरी नहीं होता, लेकिन परिवार के पास हो तो मदद मिलती है।
- शपथ वापस ली जा सकती है। आप अपने जीवनकाल में कभी भी अपना फैसला बदल सकते हैं।
- मृत्यु के बाद देर न करें। आंखें आदर्श रूप से करीब 6 घंटे के अंदर ली जाती हैं, इसलिए तुरंत आई बैंक को फोन करें। आई बैंक की टीम को आमतौर पर मृत्यु प्रमाण पत्र या डॉक्टर के लिखे मृत्यु के कारण की ज़रूरत पड़ सकती है।
- नंबर सेव कर लें। अपने और परिवार के फोन में नज़दीकी आई बैंक और हेल्पलाइन का नंबर सेव रखें।
नेत्रदान की प्रक्रिया – Netradaan Ki Prakriya
- परिवार आई बैंक को फोन करके सूचना देता है। मृत्यु के बाद जितनी जल्दी हो सके, आदर्श रूप से करीब 6 घंटे के अंदर।
- आई बैंक की प्रशिक्षित टीम उस घर या अस्पताल में आती है जहां मृतक को रखा गया है।
- टीम परिवार से बात करती है, लिखित सहमति लेती है और दाता के मेडिकल इतिहास के बारे में कुछ सवाल पूछ सकती है।
- पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर करीब 15 से 20 मिनट लगते हैं और साफ-सुथरी, जीवाणु-रहित स्थितियों में की जाती है।
- प्रक्रिया के बाद पलकें बंद कर दी जाती हैं और चेहरा सामान्य दिखता है। अंतिम संस्कार में कोई देरी नहीं होती।
- दान की गई आंख को आई बैंक ले जाकर उसकी जांच की जाती है। उपयुक्त कॉर्निया आमतौर पर चार दिन के अंदर ट्रांसप्लांट कर दिया जाता है।
- दाता और प्राप्तकर्ता, दोनों की पहचान गोपनीय रखी जाती है।
नेत्रदान पूरी तरह निःशुल्क है। इसके लिए परिवार से कोई पैसा नहीं लिया जाता और परिवार को भी कोई पैसा नहीं दिया जा सकता।
दान की गई आँखों का उपयोग कैसे किया जाता है? Daan Ki Gayi Aankhon Ka Upyog Kaise Kiya Jaata Hai?

एक दाता की दो आंखों से आमतौर पर दो लोगों को रोशनी मिल सकती है। कुछ नई सर्जरी में कॉर्निया की सिर्फ खराब परत बदली जाती है, इसलिए कभी-कभी एक कॉर्निया का फायदा एक से ज़्यादा मरीज़ को मिल सकता है।
जो आंखें ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त नहीं होतीं, वे बेकार नहीं जातीं। उनका उपयोग मेडिकल रिसर्च और डॉक्टरों व मेडिकल छात्रों की पढ़ाई में किया जाता है।
एक ज़रूरी बात: नेत्रदान सिर्फ कॉर्निया की खराबी की वजह से अंधे हुए लोगों की मदद करता है। रेटिना या ऑप्टिक नर्व की बीमारी से आई रोशनी की कमी कॉर्निया ट्रांसप्लांट से ठीक नहीं होती।
हर साल ज़रूरत के मुकाबले काफी कम कॉर्निया मिल पाते हैं, इसीलिए ज़्यादा लोगों का नेत्रदान का संकल्प लेना बहुत ज़रूरी है। कॉर्निया की बीमारियों के बारे में पढ़ें: कॉर्निया सर्जरी।
दिल्ली में नेत्र बैंक – Delhi Mein Netra Bank
| नाम | फोन नंबर |
|---|---|
| आई मंत्रा हॉस्पिटल | 011-40455119 |
| नेशनल आई बैंक (एम्स) | 011-26569461 |
| एम्स (आपातकालीन) | 011-26569461 |
| रॉटरी दिल्ली सेंटर आई बैंक, सर गंगा राम हॉस्पिटल | 011-25781837 |
| सर गंगा राम हॉस्पिटल | 011-25721800 |
नेत्रदान के संबंध में धार्मिक मान्यता – Netradaan Ke Sambandh Mein Dharmik Manyata
कुछ लोग नेत्रदान करने से पहले अपने धर्म से डरते हैं। उन्हें लगता है कि उनका धर्म नेत्रदान पर रोक लगाएगा। दुनिया में कोई भी धर्म नेत्रदान की निंदा नहीं करता है। सभी प्रमुख धर्म तो अंगदान स्वीकार करते हैं। इसके अलावा वे व्यक्तिगत सदस्यों को अपना निर्णय लेने का अधिकार देते हैं। अधिकांश विश्वास दान के रूप में और जीवन को बचाने के साधन के रूप में अंग दान के पक्ष में हैं। कुछ लोगों की यह धारणा है कि यदि वे अपनी आंखें दान करते हैं, तो वे अपने देवताओं को नाराज कर देंगे और अंधे होकर पृथ्वी पर लौट आएंगे। हिंदुओं में यह माना जाता है कि हम कभी नहीं मरते हैं, अर्थात हमारी आत्मा हमेशा जीवित रहती है, यह सिर्फ शरीर है जो बदलता रहता है। इसलिए लोगों द्वारा आंख या किसी अंग दान को बढ़ावा दिया जाता है।
हिंदू धर्म: हिंदुओं को अपने अंगदान करने से धार्मिक कानून द्वारा बिल्कुल भी प्रतिबंधित नहीं किया गया है। हिंदू पौराणिक कथाओं में ऐसी कहानियां हैं जिनमें मानव शरीर के अंगों का उपयोग अन्य मनुष्यों और समाज के लाभ के लिए किया जाता है। मनुस्मृति को उद्धृत करने के लिए, “उन सभी चीजों में से जो दान करना संभव है, अपना स्वयं का शरीर दान करना असीम रूप से अधिक सार्थक है”। वस्तुत: दस नियमों में दान तीसरे नंबर पर है, इसके महत्व पर बल देता है।
इस्लाम: अधिकांश इस्लामी धार्मिक नेता जीवन के दौरान अंग दान स्वीकार करते हैं (बशर्ते यह दाता को नुकसान न पहुंचाए) और मृत्यु के बाद एक जीवन को बचाने के लिए उपयोगी हो। कुरान को उद्धृत करने के लिए, सूरत अल-मैदा कहते हैं: “और जिसने एक जीवन को बचाया, उसने पूरी मानवता को बचा लिया।”
ईसाई धर्म: “अपने पड़ोसी से प्यार करने” की आज्ञा को यीशु ने उद्धृत किया था। इसका तात्पर्य यह है कि अधिकांश ईसाई नेता व्यक्ति के मरने के बाद अंगदान स्वीकार करते हैं। और अंग काटने की प्रक्रिया से दाता की जान नहीं जाती।
बौद्ध धर्म और जैन धर्म: ये दोनों धर्म करुणा और दान को बहुत महत्व देते हैं, जिन्हें महत्वपूर्ण माना जाता है। इन धर्मों के समुदाय के नेताओं और भिक्षुओं द्वारा अंगदान का व्यापक समर्थन किया गया है। बौद्ध इसे दूसरे के लिए अपना मांस दान करने का एक महान गुण मानते हैं।
सिख धर्म: सिख दर्शन दूसरों को अपने से पहले देने और रखने के महत्व पर जोर देता है। सिखों के लिए सबसे बड़ा पुण्य का कार्य मानव जीवन को बचाने का कार्य है। इसलिए मृत्यु के बाद अंगदान करने की सभी सिख नेताओं द्वारा वकालत की गई है।
निष्कर्ष – Nishkarsh
ट्रांसप्लांट प्राप्त करने वाले ज़्यादातर मरीज़ अधिक उम्र के होते हैं क्योंकि कॉर्नियल ब्लाइंडनेस का सबसे आम कारण बड़े आयु वर्ग को प्रभावित करता है। हालांकि बहुत सारे बच्चे और युवा वयस्क भी हैं जो कॉर्नियल ट्रांसप्लांट से लाभान्वित होते हैं। कुछ युवा जो किसी दुर्घटना या दुर्घटना से अपनी दृष्टि खो चुके होते हैं, उन्हें नेत्रदान से सबसे अधिक लाभ होता है। नेत्रदान किसी के जीवन को हमेशा के लिए बदल सकता है। इसी तरह ज्यादातर डोनर भी बुजुर्ग होते हैं। नेत्र बैंक आमतौर पर 2 से 70 वर्ष की आयु के बीच के दाताओं से दान स्वीकार करते हैं। अंगूठे के एक नियम के रूप में रोगियों को लगभग उसी उम्र या अपने से कम उम्र के दाताओं से कॉर्नियल ऊतक प्राप्त होता है। आई बैंक किसी भी तरह के नेत्रदान से मना नहीं करते हैं। लेकिन 75 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के दान का उपयोग आमतौर पर शोध उद्देश्यों के लिए किया जाता है। यदि ऊतक स्वस्थ है, तो इसे ट्रांसप्लांट के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। अगर आप दिल्ली में एक अच्छे नेत्र अस्पताल की तलाश में हैं और आप आंखों से संबंधित कोई सर्जरी करवाना चाहते हैं, तो हमारी वेबसाइट Eyemantra.in पर जाएं। हम रेटिना सर्जरी, मोतियाबिंद सर्जरी, चश्मा हटाने जैसी कई और अधिक सेवाएं प्रदान करते हैं। अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए +91-9711115191 पर कॉल करें या eyemantra1@gmail.com पर ईमेल करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
उत्तर: नेत्रदान का मतलब है मृत्यु के बाद अपनी आंखों (कॉर्निया) को ऐसे व्यक्ति के लिए दान करना, जिसकी रोशनी कॉर्निया की खराबी से चली गई हो।
उत्तर: आंखें मृत्यु के बाद जितनी जल्दी हो सके, आदर्श रूप से करीब 6 घंटे के अंदर ली जानी चाहिए। इसलिए मृत्यु के तुरंत बाद आई बैंक को फोन करें।
उत्तर: नहीं। नेत्रदान सिर्फ मृत्यु के बाद होता है। जीवित व्यक्ति सिर्फ नेत्रदान का संकल्प ले सकता है।
उत्तर: नहीं। प्रक्रिया के बाद पलकें बंद कर दी जाती हैं और चेहरा सामान्य दिखता है। ट्रांसप्लांट सिर्फ कॉर्निया का होता है, पूरी आंख का नहीं।
उत्तर: आप ऑनलाइन शपथ फॉर्म भर सकते हैं (सरकारी प्रतिज्ञा पोर्टल या EBAI और नेत्र अस्पतालों की वेबसाइट पर) या अपने नज़दीकी पंजीकृत नेत्र बैंक में जाकर फॉर्म भर सकते हैं। यह निःशुल्क है और पूरा होने पर आमतौर पर कार्ड या प्रमाणपत्र मिलता है। शपथ लेने के बाद परिवार को ज़रूर बताएं।
उत्तर: हां। मृत्यु के समय आई बैंक की टीम परिवार (निकटतम रिश्तेदार) से लिखित सहमति लेती है। इसलिए परिवार को अपने फैसले की जानकारी देना ज़रूरी है।
उत्तर: नहीं। नेत्रदान पूरी तरह निःशुल्क है। परिवार से कोई पैसा नहीं लिया जाता और परिवार को भी कोई पैसा नहीं दिया जा सकता।
उत्तर: हां, चश्मा पहनने वाले और मोतियाबिंद सर्जरी करवा चुके लोग नेत्रदान कर सकते हैं। डायबिटीज़ या हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग भी कर सकते हैं।
उत्तर: कॉर्निया की खराबी की वजह से अंधे हुए लोगों को। एक दाता की दो आंखों से आमतौर पर दो लोगों को रोशनी मिल सकती है। रेटिना या ऑप्टिक नर्व की बीमारी से हुए अंधेपन में कॉर्निया ट्रांसप्लांट काम नहीं करता।
